हे धन्य स्वप्न
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हिन्दी
चाहे वस्तुएँ बुरी हों या भली — चाहे हर्षोल्लास से मुख आलोकित हो, या दुःख का सागर उफन पड़े — एक नाटक — हम सभी का एक पात्र है, प्रत्येक अपनी भूमिका में रोने या हँसने के लिए; प्रत्येक अपना वेश धारण करता है — इसके दृश्य बारी-बारी धूप और वर्षा। हे स्वप्न, हे धन्य स्वप्न! दूर-दूर तक फैला दो अपना धुन्ध का आवरण, उन तीखी रेखाओं को मन्द कर दो, जो खुरदरापन लगता है उसे चिकना कर दो। तुम्हारे सिवा कोई जादू नहीं! तुम्हारा स्पर्श मरुस्थल को जीवन में पुष्पित करता है। कठोर गर्जन, सबसे मधुर गीत बन जाता है, भयंकर मृत्यु, मधुर मुक्ति।
English
If things go ill or well --
If joy rebounding spreads the face,
Or sea of sorrow swells --
A play -- we each have part,
Each one to weep or laugh as may;
Each one his dress to don --
Its scenes, alternative shine and rain.
Thou dream, O blessed dream!
Spread far and near thy veil of haze,
Tone down the lines so sharp,
Make smooth what roughness seems.
No magic but in thee!
Thy touch makes desert bloom to life.
Harsh thunder, sweetest song,
Fell death, the sweet release.
## References
पाठ विकिस्रोत से, सार्वजनिक डोमेन। मूल प्रकाशन अद्वैत आश्रम द्वारा।