विवेकानन्द अभिलेखागार

शुक्रवार, २८ जून

खंड7 lecture
83 शब्द · 1 मिनट पठन · Inspired Talks

यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से किया गया है और इसमें त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक पाठ के लिए कृपया मूल अंग्रेज़ी देखें।

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हिन्दी

(शिष्या मिस एस. ई. वाल्डो द्वारा लिपिबद्ध) शुक्रवार, २८ जून, १८९५। (आज समस्त दल सारे दिन के लिए भ्रमण पर गया था, और यद्यपि स्वामीजी जहाँ भी होते थे वैसे ही निरन्तर शिक्षा देते रहे, किन्तु कोई टिप्पणी नहीं ली गई इसलिए उनके कथन का कोई लेख नहीं रह गया। तथापि जब वे प्रस्थान से पूर्व प्रातराश करने बैठे, उन्होंने यह उक्ति की:) सभी अन्न के लिए कृतज्ञ रहो, वह ब्रह्म है। उनकी विश्व-व्यापी ऊर्जा हमारी व्यक्तिगत ऊर्जा में रूपान्तरित होती है और हम जो कुछ भी करते हैं उसमें हमारी सहायता करती है।

English

(RECORDED BY MISS S. E. WALDO, A DISCIPLE)

FRIDAY, June 28, 1895. (The entire party went on a picnic for the day, and although the Swami taught constantly, as he did wherever he was, no notes were taken and no record, therefore, of what he said remains. As he began his breakfast before setting out, however, he remarked:)

Be thankful for all food, it is Brahman. His universal energy is transmuted into our individual energy and helps us in all that we do.


पाठ विकिस्रोत से, सार्वजनिक डोमेन। मूल प्रकाशन अद्वैत आश्रम द्वारा।