पत्र, साक्षात्कार, व्याख्यान एवं प्रवचनों की टिप्पणियाँ, प्रश्नोत्तर
स्वामी विवेकानन्द के समग्र वाङ्मय का पंचम खंड — पत्र, साक्षात्कार, व्याख्यान एवं प्रवचनों की टिप्पणियाँ, प्रश्नोत्तर।
ऐतिहासिक सन्दर्भ
पंचम खंड में विवेकानन्द के पत्रों की प्रथम शृंखला संकलित है — १८८९ से १९०२ के मध्य शिष्यों, मित्रों और सन्यासी-बन्धुओं को लिखे गए व्यक्तिगत पत्र — जो उनके निजी विचारों, संघर्षों और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की अन्तरंग झलक प्रस्तुत करते हैं। इसमें साक्षात्कार, व्याख्यान-टिप्पणियाँ, तथा अभिलिखित वार्तालाप और संवाद भी सम्मिलित हैं जो उनकी सहज, अलिखित शिक्षण-शैली को प्रतिबिम्बित करते हैं।
विषय-सूची
लन्दन में एक भारतीय योगी
Interviews
बौद्ध धर्म और वेदान्त
Notes from Lectures and Discourses
विकास
Notes from Lectures and Discourses
I हार्वर्ड विश्वविद्यालय की स्नातक दार्शनिक सभा में चर्चा
Questions and Answers
I फकीर
Epistles - First Series
I श्री सुरेन्द्र नाथ दास गुप्ता
Conversations and Dialogues
II बॉस्टन के ट्वेन्टिएथ सेंचुरी क्लब में
Questions and Answers
II पण्डितजी महाराज
Epistles - First Series
II - V श्री सुरेन्द्र नाथ सेन
Conversations and Dialogues
III अलासिंगा
Epistles - First Series
III ब्रुकलिन एथिकल सोसायटी, ब्रुकलिन में
Questions and Answers
भारत और इंग्लैण्ड
Interviews
इंग्लैण्ड में भारतीय मिशनरी का ध्येय
Interviews
भारत का ध्येय
Interviews
ईश्वर और ब्रह्म
Notes from Lectures and Discourses
IV अलासिंगा
Epistles - First Series
IV मठ की डायरी से चयन
Questions and Answers
IX शरत
Epistles - First Series
नियम और स्वतन्त्रता
Notes from Lectures and Discourses
चमत्कार
Interviews
टिप्पणी
Epistles - First Series
कला पर
Notes from Lectures and Discourses
भक्तियोग पर
Notes from Lectures and Discourses
कट्टरता पर
Notes from Lectures and Discourses
भारतीय नारियाँ — उनका अतीत, वर्तमान और भविष्य
Interviews
ज्ञानयोग पर
Notes from Lectures and Discourses
कर्मयोग पर
Notes from Lectures and Discourses
भाषा पर
Notes from Lectures and Discourses
हिन्दू धर्म की सीमाओं पर
Interviews
वेदान्त दर्शन पर
Notes from Lectures and Discourses
तर्क, श्रद्धा और प्रेम
Writings: Prose and Poems
राष्ट्रीय आधार पर हिन्दू धर्म का पुनर्जागरण
Interviews
साधना अथवा उच्चतर जीवन की तैयारी
Notes from Lectures and Discourses
वचन और उक्तियाँ
Sayings and Utterances
छह संस्कृत सूक्तियाँ
Writings: Prose and Poems
विदेश और स्वदेश की समस्याएँ
Interviews
अद्वैत आश्रम, हिमालय
Writings: Prose and Poems
राजयोग का उद्देश्य
Notes from Lectures and Discourses
बेलूर मठ: एक अपील
Writings: Prose and Poems
भ्रम का कारण
Notes from Lectures and Discourses
ब्रह्माण्ड और आत्मा
Notes from Lectures and Discourses
पूर्व और पश्चिम
Writings: Prose and Poems
अधिकारवाद की बुराइयाँ
Notes from Lectures and Discourses
साक्षात्कार का लक्ष्य और विधियाँ
Notes from Lectures and Discourses
दिव्य ज्ञान का सन्देश
Writings: Prose and Poems
पश्चिम में प्रथम हिन्दू संन्यासी का प्रचार-कार्य और भारत के पुनरुत्थान की उनकी योजना
Interviews
रामकृष्ण सेवाश्रम, वाराणसी: एक अपील
Writings: Prose and Poems
संन्यासी
Notes from Lectures and Discourses
संन्यासी और गृहस्थ
Notes from Lectures and Discourses
चार जुलाई को
Writings: Prose and Poems
V अलासिंगा
Epistles - First Series
V योग, वैराग्य, तपस्या, प्रेम
Questions and Answers
VI हरिपद
Epistles - First Series
VI निवेदिता को उत्तर में
Questions and Answers
VI - X श्री प्रिय नाथ सिन्हा
Conversations and Dialogues
VII मित्रगण
Epistles - First Series
VII गुरु, अवतार, योग, जप, सेवा
Questions and Answers
VIII अलासिंगा
Epistles - First Series
सच्चा गुरु कौन है?
Notes from Lectures and Discourses
कौन जाने माँ कैसे खेलती हैं!
Writings: Prose and Poems
मदुरा में स्वामी विवेकानन्द के साथ
Interviews
कर्म ही पूजा है
Notes from Lectures and Discourses
निष्काम कर्म
Notes from Lectures and Discourses
विश्वव्यापी एकता
Notes from Lectures and Discourses
X अलासिंगा
Epistles - First Series
XI अलासिंगा
Epistles - First Series
XI - XV एक शिष्य की डायरी से, श्री शरत चन्द्र चक्रवर्ती
Conversations and Dialogues
XII भगिनी
Epistles - First Series
XIII अलासिंगा
Epistles - First Series
XIV अलासिंगा
Epistles - First Series
XIX वेहेमिया
Epistles - First Series
XV किडी
Epistles - First Series
XVI भगिनी
Epistles - First Series
XVII अलासिंगा
Epistles - First Series
XVIII अलासिंगा
Epistles - First Series
XX भगिनी
Epistles - First Series
XXI कृपाधन्य और प्रियतम
Epistles - First Series
XXII अलासिंगा
Epistles - First Series
XXIII किडी
Epistles - First Series
XXIV कृपाधन्य और प्रियतम
Epistles - First Series
XXIX जी. जी.
Epistles - First Series
XXV अलासिंगा
Epistles - First Series
XXVI धर्मपाल
Epistles - First Series
XXVII अलासिंगा
Epistles - First Series
XXVIII श्रीमती बुल
Epistles - First Series
इस खंड के प्रमुख उद्धरण
“सच्ची सफलता और सच्चे सुख का महान रहस्य यह है: जो पुरुष या स्त्री कोई प्रतिदान नहीं माँगता, जो पूर्णतः निःस्वार्थ व्यक्ति है, वही सबसे अधिक सफल है।”
“स्वयं पर विश्वास रखो, महान विश्वास महान कर्मों की जननी हैं।”
“मन को प्रसन्न रखो किन्तु शान्त। उसे कभी अतिरेक में मत जाने दो, क्योंकि प्रत्येक अतिरेक के पश्चात् प्रतिक्रिया अवश्य होती है।”
85
अध्याय
98,106
शब्द
392
मिनट पठन
7
खंड