विवेकानन्द अभिलेखागार

विश्व-धर्म पर

विवेकानन्द की विश्व-धर्म की दृष्टि विद्यमान धर्मों के स्थान पर कोई नया पन्थ खड़ा करना नहीं थी, बल्कि इस तथ्य की मान्यता थी कि सभी धर्म एक ही परम सत्य की ओर ले जाने वाले भिन्न-भिन्न मार्ग हैं। १८९३ के शिकागो धर्म संसद में सर्वाधिक स्मरणीय रूप से घोषित, यह विचार वेदान्त की उस अन्तर्दृष्टि पर आधारित है कि अनन्त ईश्वर को किसी एक रूप, नाम या शास्त्र से पूर्णतया व्यक्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रत्येक धर्म से आह्वान किया कि वह अपनी विशिष्टता बनाए रखते हुए अन्य धर्मों की भावना को आत्मसात् करे, जिससे साम्प्रदायिक संघर्ष परस्पर सम्मान और साझे आदर्श से एकीकृत धर्मों के सामंजस्य में रूपान्तरित हो।

विश्व-धर्म पर पर प्रमुख उद्धरण

“My thanks to those noble souls whose large hearts and love of truth first dreamed this wonderful dream and then realised it”

— Volume 1, Address at the Final Session

“If China, or Japan, or Srilanka follow the teachings of the Great Master, India worships him as God incarnate on earth”

— Volume 1, Buddhism, the Fulfillment of Hinduism

“They have all received tremendous shocks and all of them prove by their survival their internal strength”

— Volume 1, Paper on Hinduism


विश्व-धर्म पर पर रचनाएँ

खंड1 lecture HI

अन्तिम सत्र में भाषण

Addresses at The Parliament of Religions

433 शब्द

2 मिनट पठन

खंड1 lecture HI

बौद्ध धर्म, हिन्दू धर्म की पूर्णता

Addresses at The Parliament of Religions

839 शब्द

3 मिनट पठन

खंड1 essay HI

हिन्दू धर्म पर निबन्ध

Addresses at The Parliament of Religions

4,940 शब्द

20 मिनट पठन

खंड1 lecture HI

धर्म भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता नहीं

Addresses at The Parliament of Religions

186 शब्द

1 मिनट पठन

खंड1 lecture HI

स्वागत का प्रत्युत्तर

Addresses at The Parliament of Religions

472 शब्द

2 मिनट पठन

खंड1 lecture HI

हम असहमत क्यों हैं

Addresses at The Parliament of Religions

385 शब्द

2 मिनट पठन

खंड2 lecture HI

विश्वधर्म का आदर्श

Practical Vedanta and other lectures

7,819 शब्द

31 मिनट पठन

खंड2 lecture HI

विश्वधर्म की साक्षात्कार का मार्ग

Practical Vedanta and other lectures

5,655 शब्द

23 मिनट पठन

खंड2 lecture HI

विविधता में एकता

Jnana-Yoga

4,965 शब्द

20 मिनट पठन

खंड3 essay HI

धर्म संसद में

Reports in American Newspapers

874 शब्द

3 मिनट पठन

खंड3 lecture HI

एकता, धर्म का लक्ष्य

Lectures and Discourses

1,698 शब्द

7 मिनट पठन

खंड5 lecture HI

विश्वव्यापी एकता

Notes from Lectures and Discourses

154 शब्द

1 मिनट पठन

इस विषय पर 14 में से 12 रचनाएँ प्रदर्शित


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