XIV माँ
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हिन्दी
XIV श्रीमती जी॰ डब्ल्यू॰ हेल को डेट्रॉयट मंगलवार, २७ मार्च, १८९४ प्रिय माताजी, इसके साथ ही $११४ और $७५ के दो चेक भेज रहा हूँ जो मेरी ओर से बैंक में जमा कर दिए जाएं। मैंने उन्हें आपकी देखभाल में पृष्ठांकित कर दिया है। एक-दो दिन में बोस्टन जा रहा हूँ। मेरे पास $५७ हैं। यह काफी काम आएंगे। कुछ न कुछ तो निकलेगा ही, जैसा सदा होता है। बोस्टन के बाद कहाँ जाऊँगा — नहीं जानता। श्रीमती [फ्रांसिस डब्ल्यू॰] ब्रीड को लिखा है परन्तु अभी तक कोई उत्तर नहीं मिला।[6]* उसकी इच्छा पूर्ण हो। "मैं नहीं, बल्कि तू" — यही सदा मेरे जीवन का मन्त्र है। शाश्वत कृतज्ञता, प्रेम और आदर के साथ, माँ-कलीसिया और समस्त गणमान्य महानुभावों के लिए, आपका पुत्र, विवेकानन्द।
English
XIV
To Mrs. G. W. Hale
DETROIT
Tuesday, 27 March 1894
DEAR MOTHER,
Herewith I send two cheques of $114 and $75 to be put in the banks for me. I have endorsed them to your care.
I am going to Boston in a day or two. I have got $57 with me. They will go a long way. Something will turn up, as it always does. I do not know where I go from Boston. I have written to Mrs. [Francis W.] Breed but as yet heard nothing from her.[6]* His will be done. Not I but Thou — that is always the motto of my life.
With my eternal gratitude, love, and admiration for Mother Church and all the dignitaries,
I remain your son,
VIVEKANANDA.
पाठ विकिस्रोत से, सार्वजनिक डोमेन। मूल प्रकाशन अद्वैत आश्रम द्वारा।